भारतीय राष्ट्रवाद देशभक्ति की अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है न कि किसी गलत अवधारणा को

मोदीनगर। भारतीय राष्ट्रवाद किसी भी गलत अवधारणा को बढावा नहीं देता बल्कि यह देशभक्ति की अभिव्यक्ति को ही बढाता है। यह भारत की अपनी ऑनलाइन मैगजीन वॉयस आॅफ इंडिया के माध्यम से किये जा रहे उस प्रचार के विपरीत है कि भारतीय मुसलमान राष्ट्रवाद की बीमारी के शिकार हैं। आईएसआईएस को इस तथ्य का एहसास होना चाहिए कि भारत यहां के मुस्लिमों की प्रिय मातृभूमि है। भारतीय संदर्भ में राष्ट्रवाद देशभक्ति की बहुलता, विविधता और राष्ट्रीय विशेषताओं पर आधारित है, जो राष्मट्रीय हितों की प्राप्ति के लिए एकता और भाईचारे की भावना के साथ भारतीय जनमानस को एक सूत्र में बांधती है। भारतीय राष्ट्रवाद की धारणा को संवैधानिक माध्यम से सही ढंग से समझा जा सकता है। भारतीय नागरिकों को धर्म के मामले में आस्था, संस्कृति और जाति की बाध्यता में अंतर के सम्पूर्ण अधिकार दिए गए हैं। भारत में प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने धर्म का पालन और अनुसरण करने का समान अवसर है, इससे जाहिर है कि भारतीय राष्ट्रवाद इस्लाम के खिलाफ बिल्कुल भी नहीं है, साथ ही आईएसआईएस समर्थकों की वह गलतफहमी को भी साबित करता है जिसमें वह मानते हैं कि भारतीय राष्ट्रवाद परिवर्तन और अहंकार है। 
इस्लाम के अनुनायी भी काफी हद तक स्वीकार करते हैं कि भारतीय राष्ट्रवाद का एक हिस्सा देशभक्ति है। भारत, जहां प्रत्येक मुस्लिम अपने धार्मिक अधिकारों, सुरक्षा और स्वतंत्रता से संपन्न है, उसके लिए एक प्यारी जगह है।  देश में मुस्लिम पाँच समय की नमाज में ईश्वर अल्लाह के सामने खुलकर झुकते हैं और उन्हें अपना सारा समय अल्लाह की इबादत करने और अपने पैगंबर की सुन्नत को मानने की आजादी है। ये भारत के मुसलमानों को दिए गए धार्मिक अधिकार हैं, जिनसे वे देशभक्ति को गले लगाते हैं। कुरान और हदीस में भी प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है, कि इंसान को अपने देश और कानून से मोहब्बत करनी चाहिए और हमेशा जुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ हमेशा आवाज उठानी चाहिए।
हदीस और धार्मिक टिप्पणियां देशभक्ति की एक ऐसी प्रवृत्ति है जो स्वाभाविक रूप से नागरिकों में रहती है, और यह तब और बढ़ती है जब वे लगातार सुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें अपने संस्कारों का अनुसरण करने की पूरी आजादी होती है। प्रो-आईएसआईएस समूह, जो  अपने जिहादी रिवायतों को प्रस्तुत करता है, उसे भी अपने निराधार दावे को बदलना चाहिए और भारतीय राष्ट्रवाद को गलत परिभाषित करने से बचना चाहिए।  
नोट-- इस लेख के मायने ये कतई नहीं है कि मुसलमान यहां दोयम दर्जे का नागरिक है यह देश जितना अन्य भारतीयों का है उतना ही यहां के मुसलमानों का भी है। लेख उन लोगों को समझाने का एक प्रयास है जो यह मानते है कि भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं और वह यहां दोयम दर्जे का नागरिक है।